CG NEWS :शिक्षकों का व्याख्याता बनने का सपना आसान नहीं…..इस प्रकिया में एक के बाद एक ट्विस्ट …..!
कमजोर पटकथा में अफसरों ने विवादित सीन इस सरकार में भी किए क्रिएट ....?

CG NEWS:सरगुजा: (मनीष जायसवाल) लोक शिक्षण संचालनालय और स्कूल शिक्षा मंत्रालय के बीच स्कूल शिक्षा के शिक्षको से जुड़े तय कार्यक्रमों में ताल मेल नही होने की वजह से यह आशंका है कि शिक्षक और हेड मास्टर से व्याख्याता के पद पर पदोन्नति की चाह रखने वाले आम शिक्षकों के सपने में पानी फिर सकता है..! अब व्याख्याता पदोन्नति में एक के बाद एक कई ट्विस्ट नजर आ रहे हैं..। इस विभाग के जमे हुए नीतिकारो ने पूर्व सरकार के कार्यकाल की तरह शिक्षको के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं में कई विवादित सीन क्रिएट कर दिए है। जिसकी वजह से
एक ही समय में शिक्षको की पदोन्नति और युक्ति युतिकरण दोनो का क्लाइमैक्स एक साथ आ गया है जिससे अब दोनो का
एक साथ होना संभव नहीं दिखाई देता है..।
भारी पड़ते युक्ति युतिकरण के किरदार की वजह से पदोन्नति की प्रकिया बहुत आगे तक बढ़ाना तय दिखाई देता है। जिसमे
शिक्षकों और स्कूलों की युक्ति युतिकरण की प्रक्रिया और इसका शेड्यूल भी एक मुख्य कारण है ..। जो अक्तूबर तक चलता रहेगा। स्कूल शिक्षा विभाग से आदेश जारी होने बाद मिले निर्देश के अनुसार शालाओं के युक्ति युक्तिकरण के लिए विकासखण्ड स्तरीय समिति की ओर से शालाओं का चिन्हांकन बीस अगस्त तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद शासन की ओर से युक्ति युक्तकृत शालाओं को आदेश 16 सितम्बर तक जारी हो जाएगा। इसी बीच में 4 सितंबर तक शिक्षको के युक्ति युक्तकरण के लिए अतिशेष शिक्षको का विकासखण्ड स्तरीय समिति की ओर से चिन्हांकन पूरा होगा। बचे हुए शिक्षको का संभागीय संयुक्त संचालक की ओर से पदस्थापना के बाद प्रेषित अतिरिक्त अतिशेष व्याख्याता का संचालक, लोक शिक्षण की ओर से पदस्थापना आदेश 11 अक्तूबर तक जारी करने का टाइम शेड्यूल मिला है।
इस बीच शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया में दूसरा बड़ा ट्विस्ट तब आ सकता है जब युक्ति युतिकरण की प्रक्रिया से असंतुष्ट होकर ….. शिक्षक या शिक्षको का समूह कोर्ट चला जाए तब की स्थिति में यह प्रकिया और आगे भी बढ़ सकती है..।जिसकी समय सीमा कोर्ट के निर्णय के बाद तय हो सकती है।
इसके बाद एक और ट्विस्ट कोर्ट के फैसले के रूप में आ सकता है। अभी उच्च वर्ग के शिक्षक का व्याख्याता बनने में शैक्षणिक योग्यता के लिए बीएड और डीएड का मामला चल ही रहा है। इसमें भी संतुष्ट और असंतुष्ट दोनो पक्ष में से कोई एक भी अगर सुप्रीम कोर्ट गए तब की स्थिति में भी यह प्रकिया और भी आसान होती हुई नही दिखाई दे रही है।
इस बीच नगरीय निकाय और पंचायत के चुनाव भी होने है। एक प्रकार से आचार संहिता भी इसी दौर में लग जाएगी। शासन प्रशासन और कर्मचारियों का एक बड़ा अमला इन चुनाव में जुट जाएगा। उसके बाद स्कूलों की परीक्षा का समय शुरू हो जाएगा। फिर अप्रैल मई तक उत्तर पुस्तिका जांचने और परीक्षा परिणाम बनाने तक विभाग व्यस्त हो जाएगा..।
ऐसे में शिक्षको की व्याख्याता पद पर पदोन्नति की प्रकिया आसान तो नहीं दिखाई दे रही है। व्याख्याता पदोन्नति की पटकथा शुरू से ही कमजोर लिखी गई है। यही वजह है अब तक इसकी फाइनल अंतिम वरिष्ठता सूची जारी नही हो पाई है..!









